Hindi

My article in Hindi on a national daily

Do you remember last year I went abroad in November sometime and was back in India around 20th December?
Well, before going out I had submitted an article to a Hindi national daily called Dainik Jagran.

The article was published early this month after much wait. My English work has been published many times but this was a first for me for a Hindi national daily!

I thought of sharing this with you before I forget. 🙂
Here is a small part from the article ज़मीन पर चाँद.

अरे ओ पंडितजी, ज़रा सुनिए तो सही! मैंने जोर से गुहार लगाई पर पंडितजी तो मानो किसी घोड़े पर सवार थे। ऐसा लग रहा था जैसे उन्होंने कोई भूत देख लिया हो।
……………….
हमें समझ आ गया था कि पंडितजी क्यों चले गए। वहां बिजली तो है नहीं, और ज्यादा लोग भी आते-जाते नहीं। झील के किनारे घने जंगल में कई जानवर पाए जाते हैं। दोपहर बाद ये जानवर, खासकर भेडि़ये अपने भोजन का प्रबंध करने निकल पड़ते हैं। फिर किसी इंसान की क्या मजाल कि यहां टिकना पसंद करे। सबको अपनी जान प्यारी होती है। हमें भी थी।

If you can read Hindi, please head over to read the full article.

बहुत सारे त्रिषा |

You can read here Malacca Part I & Malacca Part II.

Malacca@lemonicks.com/Travel

मंदिरों में भी लाल रंग की भरमार ?

मल्ल्क्का जाने पर सबसे पहले जिस पर नज़र जाती है, वो है लाल इमारतें | और साथ ही नज़र जाती है त्रिषा पर | जी हाँ त्रिषा | बहुत सारे

मल्ल्क्का – संग्रहालयों का संग्रह

पिछली बार हमने शुरुआत की थी मल्ल्क्का से, अब आगे थोड़ा और जानते हैं |

हालाँकि कुआला लम्पुर से मल्ल्क्का अधिक दूर नहीं है, फिर भी मल्ल्क्का का अपना हवाई अड्डा है | हवाई जहाज़ के अलावा कुआला लम्पुर से मल्ल्क्का जाने के लिए सबसे सरल रास्ता है कार या टूरिस्ट बस द्वारा North-South Expressway होते हुए जाना | यह मलयेशिया की सबसे लम्बी expressway  है जो उत्तर में थाईलैंड और दक्षिण में सिंगापुर तक जाती है | ज़ाहिर बात है, सड़क पर गाड़ी मक्खन की तरह भागती है |
यह 144 KMs की दूरी सड़क से २ घंटे से भी कम समय में पूरी हो जाती है | बस का किराया केवल RM 12 है | बस आपको मल्ल्क्का शहर के अन्दर सेंट्रल बस अड्डे पर उतारती है जहाँ से हर पंद्रह मिनट में लोकल बस जाती है मुख्य टूरिस्ट स्थान के लिए | अरे ! भवें न तानिये | मलयेशिया की लोकल बसें भी वातानुकूलित होती हैं | 😀 और किराया सिर्फ RM 1.50 ! अगर आपका मन करे तो जब तक आपकी बस आती है, यहाँ बस अड्डे पर तरो ताज़ा हो लें, चाय नाश्ता कर लें | विश्वास कीजिये, भारत के किसी भी

मल्लिका नहीं मल्ल्क्का !

Here is my first post in Hindi on Malacca. Read on if you can, it is different from my English posts.

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पहले छुट्टियों का मतलब होता था नाना-नानी या दादा-दादी के घर की तरफ रुख़ करना लेकिन समय के साथ धीरे धीरे यह परिभाषा बदलने लगी और लोग दूसरी जगहों पर भी जाने लगे | और आजकल तो विदेश यात्रा भी बहुत प्रचलित हो गयी है |

और जब घर से निकलने की बात है तो अधिकतर लोग २-३ देशों को एक साथ देखने का प्रोग्राम बनाते हैं | इसके मुख्यतः दो कारण हैं | पैसे और समय की बचत | जो कि एक हद तक जायज़ भी है | समय एवं पूँजी की समस्या न हो तो यूरोप जायें और बिना २-३ देशों का भ्रमण किये लौट आयें, यह हो नहीं सकता | अरे भाई, बार-२ विदेश यात्रा थोड़े ही होती है |

@lemonicks.com/Travel

इसी प्रकार जब कभी