monuments

Tips to visit Petronas

One of the major attractions of Kuala Lumpur, Malaysia is majestic Petronas, the twin towers and it is definitely a ‘must visit’ place. People come to Kuala Lumpur with tight schedule thinking they can cover all major landmarks in a day before heading to more ‘attractive’ places of this beautiful country. The travel packages also do not include going up the Petronas in their itinerary. All they do is to take a round and show it from outside.

While getting to the Petronas Towers is easy from anywhere in Kuala Lumpur, getting tickets for skybridge tour is not always so easy. If you do not plan, and out of the blue decide to

World Heritage Sites of India

Sometime back I had written about ASI (Archaeological Survey of India) being an issuing authority for a common entry ticket for all World Heritage sites in India. This was mainly done to reduce the waiting period in queue and other hassles faced while visiting these places.

@lemonicks.com

After buying entrance tickets these people are waiting for security check

Tickets for individual sites are also made

मल्ल्क्का – संग्रहालयों का संग्रह

पिछली बार हमने शुरुआत की थी मल्ल्क्का से, अब आगे थोड़ा और जानते हैं |

हालाँकि कुआला लम्पुर से मल्ल्क्का अधिक दूर नहीं है, फिर भी मल्ल्क्का का अपना हवाई अड्डा है | हवाई जहाज़ के अलावा कुआला लम्पुर से मल्ल्क्का जाने के लिए सबसे सरल रास्ता है कार या टूरिस्ट बस द्वारा North-South Expressway होते हुए जाना | यह मलयेशिया की सबसे लम्बी expressway  है जो उत्तर में थाईलैंड और दक्षिण में सिंगापुर तक जाती है | ज़ाहिर बात है, सड़क पर गाड़ी मक्खन की तरह भागती है |
यह 144 KMs की दूरी सड़क से २ घंटे से भी कम समय में पूरी हो जाती है | बस का किराया केवल RM 12 है | बस आपको मल्ल्क्का शहर के अन्दर सेंट्रल बस अड्डे पर उतारती है जहाँ से हर पंद्रह मिनट में लोकल बस जाती है मुख्य टूरिस्ट स्थान के लिए | अरे ! भवें न तानिये | मलयेशिया की लोकल बसें भी वातानुकूलित होती हैं | 😀 और किराया सिर्फ RM 1.50 ! अगर आपका मन करे तो जब तक आपकी बस आती है, यहाँ बस अड्डे पर तरो ताज़ा हो लें, चाय नाश्ता कर लें | विश्वास कीजिये, भारत के किसी भी

मल्लिका नहीं मल्ल्क्का !

Here is my first post in Hindi on Malacca. Read on if you can, it is different from my English posts.

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पहले छुट्टियों का मतलब होता था नाना-नानी या दादा-दादी के घर की तरफ रुख़ करना लेकिन समय के साथ धीरे धीरे यह परिभाषा बदलने लगी और लोग दूसरी जगहों पर भी जाने लगे | और आजकल तो विदेश यात्रा भी बहुत प्रचलित हो गयी है |

और जब घर से निकलने की बात है तो अधिकतर लोग २-३ देशों को एक साथ देखने का प्रोग्राम बनाते हैं | इसके मुख्यतः दो कारण हैं | पैसे और समय की बचत | जो कि एक हद तक जायज़ भी है | समय एवं पूँजी की समस्या न हो तो यूरोप जायें और बिना २-३ देशों का भ्रमण किये लौट आयें, यह हो नहीं सकता | अरे भाई, बार-२ विदेश यात्रा थोड़े ही होती है |

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इसी प्रकार जब कभी